रिपोर्ट @मोहम्मद शकील 

अनुपपुर :- जनजातीय समुदायों का कल्याण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा जनजातीय छात्रों, युवाओं एवं महिलाओं  को आगे बढ़ने के नए-नए अवसर मिले हैं, जनजातीय परंपराओं का सम्मान करते हुए जनजातीय कल्याण बजट पिछले 7-8 वर्षों में तीन गुने से अधिक हो गया है। भारत देश के अंदर लगभग 700 प्रकार के जनजातीय समाज के लोग निवास करते हैं, जिसमें जनजातिय समाज, पहाड़ों , जंगलों एवं गाँवों  में निवासरत  हैं । वर्ष 2022-23 के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय के लिए 8,451 करोड़ रुपये के  बजट परिव्यय में 12.32 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि की गयी है तथा कैबिनेट ने जनजातीय विकास के लिए 58,399 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी है।  वित्त वर्ष 2022-23 में एसटीसी घटक में 87,500 करोड़ रुपये की वृद्धि करके जनजातीय समुदायों का सर्वांगीण विकास को पिछले 75 वर्षों में सबसे तेज गति दी गयी है। वित्त वर्ष 2022-2023 के बजट परिव्यय में जनजातीय कार्य के लिए कुल बजट परिव्यय को बढ़ाकर 8451.92 करोड़ रुपये निश्चित किए हैं, जो कि कुल बजट परिव्यय में 12.32 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दिखती है।

देशभर के जनजातीय इलाकों में ब्‍लॉक स्‍तर पर एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS)  स्‍कूल खोले जा रहे है । आज पूरे भारत में कुल  686 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय है ।

हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और माननीय  जनजातिय  कार्य मंत्री भारत सरकार के नेतृत्व में 2022-23 में 689  स्कूल सेंक्सन  हुए हैं, जिनमें 401 स्कूल कार्यरत हैं, जिसके लिए  2400 करोड़ रूपये   जनजातिय कार्य   मंत्रालय द्वारा स्वीकृत  किया गया  हैं ।

आज हमारे देश में 3500 जनजातीय विद्यार्थियों को पीएचडी कराया जा रहा है। 

4000 विद्यार्थियों को चिकित्सा इंजीनियरिंग कराया जा रहा है । 

94 विद्यार्थियों को एम्स में चिकित्सा शिक्षा के लिए अध्ययनरत हैं ।

318  विद्यार्थी IIM  में अध्ययनरत है । 

1300 विद्यार्थी IIT में अध्ययनरत है ।

 2862 NIIT में अध्ययनरत है । 

आज देश में 689 स्कूल में 394  स्कूल चालू हो चुकें  हैं । शेष  में भवन निर्माण एवं अन्य कार्य चल रहे हैं ।

2022-23 में  भारत सरकार का लक्ष्य 740 एकलव्य आवासीय विद्यालय (EMRS) खोलने का है, पुराने स्कूलों को उन्नयन कर सभी को 5 करोड़ की राशि स्वीकृत की जा रही है ।

विद्यार्थियों के लिए आवासीय विद्यालय में पुस्तकालय, खेल, लाइब्रेरी, एनसीसी एवं सभी प्रकार की सुविधाएं छात्रों को दिया जा रहा है ।

पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप, अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप, संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के प्रावधान के तहत अनुदान, जनजातीय उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए से टीएसएस), उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के जनजातीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विपणन और लॉजिस्टिक संबंधी विकास, अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए काम करने वाले स्वयंसेवी संगठनों को सहायता, अनुसूचित जनजातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम), जनजातीय अनुसंधान सूचना, शिक्षा, संचार और कार्यक्रम (टीआरआई-ईसीई), निगरानी, मूल्यांकन, सर्वेक्षण, सामाजिक लेखा-परीक्षा (एमईएसएसए), अनुसूचित जनजातियों के छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय फेलोशिप, राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना, जनजातीय अनुसंधान संस्थान को सहायता तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) का विकास सभी मद में बजट को कई गुना बढ़ाया गया है जिससे जनजातीय समुदायों का सर्वांगीण  कल्याण  हो रहा है ।

केंद्र सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की संकल्पना, इन्हीं विषमताओं को मिटाने का एक प्रयास है । इसी क्रम में सरकार, समाज के सबसे पिछड़े तबके अनुसूचित जनजाति के भविष्य को मुख्यधारा में लाने के लिए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रयासरत है । एकलव्य आवासीय आदर्श विद्यालय इसी दिशा में एक कदम है।