राजेसुल्तानपुर। जिले के प्राथमिक विद्यालय सिसवां सिरसिया में राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान के तमाम दावों के बीच शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। यहां पढ़ाई के दौरान शौच लगने पर बच्चों को घर या फिर खेत की तरफ दौड़ लगानी पड़ती है। विद्यालय में तैनात शिक्षक व शिक्षिका के लिए तो और भी असहज स्थिति बन जाती है। इन सबके बीच इस विद्यालय तक पहुंचना छात्र-छात्राओं के लिए किसी जोखिम से कम नहीं है। दरअसल यहां मुख्य मार्ग पर लगभग 50 मीटर की दूरी तक इस तरह जलभराव है कि शिक्षक व छात्र-छात्राएं पगडंडी के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं। बरसात में तो अधिक समस्या होती है, लेकिन सामान्य दिनों में भी इधर से आवागमन सहज नहीं रह पाता। विद्यालय में चहारदीवारी भी नहीं बनी है। नतीजा यह है कि अभिभावक यहां अपने बच्चों का नाम लिखवाने से कतराने लगे हैं। इसके चलते ही यहां सिर्फ 23 बच्चे पंजीकृत हैं।


राज्य सरकार भले ही प्राथमिक विद्यालयों की दशा बेहतर करने के प्रयासों में जुटी हो, लेकिन जमीनी धरातल पर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। तमाम ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जो अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। ऐसा ही एक परिषदीय विद्यालय जहांगीरगंज शिक्षा क्षेत्र में है। प्राथमिक विद्यालय सिसवां सिरसिया पहुंचने के बाद ऐसा प्रतीत ही नहीं होता कि इस विद्यालय की कभी सुध ली गई हो। विद्यालय तक पहुंचने के लिए शिक्षक व छात्र-छात्राओं को पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। असल में विद्यालय तक जाने के लिए जो मुख्य मार्ग है, उसमें लगभग 50 मीटर की दूर तक सामान्य दिनों में भी जलभराव रहता है।

बरसात के दिनों में जहां स्थिति सर्वाधिक बदतर हो जाती है, तो वहीं अन्य दिनों में भी सुचारु रूप से आवागमन संभव नहीं हो पाता। रास्ते में पानी भरा होने से किसी तरह पगडंडी के सहारे बच्चे व शिक्षक आवागमन करते हैं। बीते दिनों यहां तैनात शिक्षिका इसी बदहाली के चलते स्कूटी से गिरकर गंभीर रूप से घायल भी हो चुकी हैं। विद्यालय में शौचालय भी नहीं बना है। ऐसे में बच्चों को शौच लगने पर या तो घर भागने को मजबूर होना पड़ता है या फिर खेत में जाना पड़ता है।
बदहाली के चलते घट रही छात्र संख्या
प्राथमिक विद्यालय की बदहाली के चलते छात्र संख्या यहां बढ़ने की बजाय घट रही है। गत वर्ष जहां 35 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, तो वहीं इस बार सिर्फ 23 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापक वीरेंद्र यादव व सहायक अध्यापिका नेहा मिश्रा ने ने छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए अलग-अलग पुरवों में ग्रामीणों से संपर्क साधा, लेकिन स्कूल की बदहाली को देखते हुए यहां पर अपने बच्चों का नाम दर्ज कराने के लिए अभिभावक तैयार नहीं हो रहे हैं। इसी का नतीजा है कि दो दर्जन बच्चे भी यहां पढ़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
किए जा रहे जरूरी प्रयास
स्कूल में चहारदीवारी व शौचालय का निर्माण कराने के लिए जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। यह दोनों कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएंगे। विद्यालय तक रास्ता बनवाने के लिए नवसृजित नगर पंचायत राजेसुल्तानपुर के अधिशाषी अधिकारी को पत्र भेजा गया है। जल्द ही आवागमन के लिए मार्ग बदहाली का संकट भी दूर हो जाएगा।
- सुनील कुमार यादव, खंड शिक्षा अधिकारी जहांगीरगंज



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